वो इश्क़ और वो मोहब्बत : ४

चोर हो तुम

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रात भर बारिश होते रहने की वजह से टंकी का पानी काफी ठंढा हो गया है। एक मग डालता हूँ तो सिहरन सी होती है, लेकिन फिर तभी याद आता है कि तुम भी तो बारिश में भींग रही थी। तुम्हें याद करते करते खुद भी भींगने लगता हूँ। जब काफी देर भींग लेता हूँ तो कंपकपी छूट जाती है। जल्दी से तौलिए से खुद को सुखाता हूँ और बाहर आता हूँ।

अगस्त के महीने में बारिश कभी कभी गजब की ठंढ ले आती है। बाथरूम से निकल कर पहले तो पूरे कपड़े पहनता हूँ और तभी अचानक से भूख का एहसास होता है। वापस से जाकर फ्रिज खोलता हूँ तो दो अंडे और आधा पैकेट ब्रेड नजर आता है। चूल्हे पर तवा चढ़ाकर  पहले तो ब्रेड गरम करता हूँ और फिर उन भावी चूजों का ऑमलेट बना देता हूँ।

ब्रेड ऑमलेट से बढ़िया क्या हो सकता है सुबह सुबह। आराम से जमीन पर बिछे आसनी पर बैठकर खाने लगता हूँ। अभी तो मुश्किल से दो तीन कौर ही खाया होगा कि याद आता है कि नहाने से पहले के इशारों में एक इशारा फ़ोन करने का भी तो था। परमज्ञान प्राप्त होता है कि प्रेम की आग से ज्यादा बड़ी पेट की आग है।

ज्ञान जाए भाड़ में। तुम पहले। भागता हुआ फ़ोन के पास जाता हूँ तो देखता हूँ कि तुम्हारा मेसेज पड़ा हुआ है, "चोर हो तुम।"

बस मुस्कुरा कर रह जाता हूँ और तुम्हें फ़ोन करता हूँ लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता है। हद हो तुम भी। कभी भी फ़ोन का मुँह बंद कर देती हो। अरे नहीं! तुम्हारा फ़ोन तो हमेशा ही चुप्पी साधे रहता है। बोलने का काम तो तुम्हारा है न। मैं फिर से फ़ोन लगता हूँ। लेकिन इस बार भी वही होता है।

चुपचाप ब्रैड ऑमलेट ख़त्म करता हूँ। हाथ धोकर तौलिये से पोंछता हूँ और बिस्तर की तरफ जाता हूँ। अभी भी तुम्हारा दुपट्टा वही पड़ा है। लेकिन अब अंगड़ाइयाँ तोड़ने की बजाय मुझे बुला रहा है।

पिछला भाग: चोर हो तुम 
अगला भाग: छोटी कुर्सी

Comments

  1. भूख और प्यार में किसकी अहमियत ज्यादा है कभी -कभी दुविधा का प्रश्न हो जाता है। वैसे तो दोनों में से किसी के बिना जीवन की पूर्णता नहीं है लेकिन समयानुसार किसी एक को प्राथमिकता देनी पड़ती है।

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