वो इश्क़ और वो मोहब्बत : १

शुरुआत से थोड़ा आगे
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अचानक से बारिश तुम्हें सड़क पर घेर लेती है और तुम उस की छेड़खानियों से बचते संभलते किसी तरह घर के अंदर आ पाती हो। फिर भी वो बदमाश बादल तुम्हारे बालों को थोड़ा सा भिंगो ही डालता है।
बरामदे में पहुँच कर जब तुम अपने बालों को हौले से झटका देकर फिर से एक बारिश सी करवा देती हो। और जब बालों को सर के पीछे हाथ डाल कर बायीं तरफ ले आती हो। उँगलियाँ फेरती बालों में तुम सड़क के पार मुझे देखती हौले से मुस्काती हो। तुम्हारी मुस्कान मेरे हौसले को कुछ इस कदर बढ़ाती है कि मैं किताबों को पढ़ने के बहाने तुम्हें देखने का नाटक बंद करके किताब बगल में रख कर बस तुम्हें देखता रह जाता हूँ।
तभी शायद तुम्हारे घर के अंदर से कोई आवाज़ आती है और तुम अपने बालों को फिर से झटका देते हुए घूमकर अंदर चली जाती हो। मैं तुम्हें जाते हुए देखता रहता हूँ। और इस इन्तजार में बैठा रहता हूँ कि तुम फिर कुछ देर में बाहर आओगी। थोड़ी देर में बहुत इंतजार करने के बाद जब यकीन हो जाता है कि अभी तुम वापस नहीं आओगी। मैं भी घर के अंदर जाने के लिए मुड़ता हूँ।
जाने से पहले पलट कर देखता हूँ तो तुम्हें घर से बरामदे पर आता देख ठिठक जाता हूँ। तुम मेरी तरफ न देखते हुए भी मेरी तरफ देखकर जीत भरी मुस्कान को चेहरे पर लाती हो।
तार पर टंगे कपड़े तो जैसे तार से चिपके हुए हैं। कोई भी कपड़ा एक बार में उतर नहीं पाता। कपड़ों और तुम्हारे बीच छिड़ी जंग एक अलहद हद पर छिड़ी हुयी है। लेकिन तुम्हें भी शायद उस जंग में आनंद आने लगा है। मैं तो बस ये चाहता हूँ कि ये जंग बस चलती ही रहे कि तभी तुम दुश्मन के आखिरी सिपाही को भी मार गिराती हो।
मैं मायूस हो उठता हूँ कि तभी तुम मेरी तरफ मुड़कर कुछ इशारे उछाल कर चली जाती हो। और मैं भी मुस्कुराता हुआ अपने फ़ोन के पास जाकर बैठ जाता हूँ तुम्हारे फ़ोन के इन्तजार में ...

Comments

  1. इश्क और मोह्हबत की भिन्न स्थितियां मनुष्य को भिन्न भाव और भिन्न अनुभव दे जाती हैं
    एक अनुरक्ति भरा उद्धरण प्रस्तुत किया आपने
    भावों को छूने का सुन्दर प्रयास किया है आपने
    जैसा की आपके विषय में सदा प्रतीति हुयी है , गागर में सागर भर देते हैं आप |
    शेष इश्क के लिये मात्र यही कहेंगे

    जीवन के भिन्न पड़ावों पर,उस आगत का स्वागत हो
    जो भाव रहें हो निष्ठुर, उनके आगे ही नत हों
    आसक्ति, अनुराग से घिरते, इसमें यूँ रम जायें
    मानस बन जाता मूढ़ बड़ा, मानो ये ही बस सत हो|

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  2. अति उत्तम, उम्दा, बेहतर। keep it।

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  3. जंग कपडों से भी हो सकता है, इस भाव को बखूबी शब्दों से सजा पाने में आप सफल हुए हैं ़ प्रथम भाग तो बहुत छोटा लगा ़ देखता हूँ दूसरा भाग कैसा है?

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