बोरियत भरी दुपहरी

अक्सर देखा जाता है कि लड़कियाँ आसपास की लडकियों से जल्दी घुल मिल जाती हैं। वहीं लड़कों को एक दूसरे से घुलने में काफी वक्त लगता है फिर भी पूरी तरह घुल नहीं पाते।
मैं बात कर रहा हूँ ऑफिसों की। आप पाएँगे कि पिछले दिन आयी लड़की आफिस की बाकी लड़कियों से इस बात पर चर्चा करती मिल जाएगी कि आसपास में कहाँ पर अच्छा नेलपॉलिश मिलता है। कहाँ अच्छी चाट मिलती है।
वहीं आप एक नए लड़के को देखें तो उसे आमतौर पर सिगरेट की तलब उठती है। वो सूँघता हुआ गुमटी के कटघरे तक पहुँच ही जाता है। वहाँ जाने पर इंतजार करता है कि लाइटर कब फ्री होगा। सामने वाला सिगरेट जला कर लाइटर दे देता है और दोनों फिर छल्ले उड़ाते हुए बात करने लगते हैं कि तभी, "अबे! ये तो मेरी कंपनी का सीईओ निकला बे।"
अब ये बात अलग है कि लड़के अक्सर लड़कियों से आसानी से घुल जाते हैं। कम से कम वो तो ऐसा ही सोचते हैं।

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