छोटी छोटी बातें - बूढ़ा बरगद

वह जो किस्सों से भी पुराना है

Apr 15, 2018

छोटी छोटी बातें

छोटी छोटी बातें जिंदगी में बड़ी ख़ुशी देती हैं। अब ये बात कहाँ से आ गयी?
अभी अभी गुड़ वाली आइस क्रीम खायी तो उसी से याद आ गयी। गुड़ हमारी तरफ गाँवों में बनता है और पता नहीं क्यों मुझे बहुत पसंद है। लेकिन दिक्कत ये है कि गुड़ मेरे गाँव में नहीं बनता क्योंकि मेरे गाँव की जमीन पर गन्ने की खेती हो नहीं पाती। तो करें क्या? नानाजी जी का गाँव जो खेत और सरहा के पार है, वहाँ से लाना पड़ता है।
अब गाँव नानाजी का, कारीगर उनकी रैयत। तो जब वो चाहेंगे तब ही तो आएगा। पिछले आठ दस सालों से जब भी घर जाता हूँ, हर बार मामा को बोलता हूँ गुड़ लाने को। लेकिन वो लोग या तो मेरे लौटने के बाद लाते हैं या लाते ही नहीं हैं। लाना बोलना गलत होगा। भेजते नहीं हैं। थक हार कर उनको बोलना ही छोड़ दिया।
इधर शहरों में मिलने वाला गुड़ बड़ा अजीब सा होता है। कुछ ज्यादा ही मीठा और बिना उस सोंधी खुशबू के। तो कई साल से गुड़ खाना छूट ही चुका है। अब गुड़ के नाम पर कुछ भी तो नहीं खा लेंगे न।
अभी जब सांतनु ने बोला कि गुड़ वाली आइस क्रीम भी मिलती है तो साथ चले गए खाने। और भाई क्या बताऊँ!! गुड़ की भेली याद आ गयी।
मामाजी(Chitranjan Singh Parmar)! नहीं चाहिए आपका गुड़ अब। आपको बोलने का कोई फायदा तो है नहीं। तो अब गुड़ की आइस क्रीम से ही काम चला लेंगे।

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