हिसाब - अभिषेक सूर्यवंशी

लीक से भटका हुआ लेखक

Apr 15, 2018

हिसाब

विशेष नोट: मैं यह पोस्ट मोदी समर्थन में नहीं लिख रहा हूँ। भांड मीडिया के विरोध में लिख रहा हूँ। सामान्य तौर पर मैं विवाद से दूर रहता हूँ, लेकिन यह बर्दाश्त से बाहर हो गया तो लिखना पड़ रहा है।
साथ वाली वीडियो को देख लें फिर आगे पढ़ें।
मोदी जी ने कहा कि पिछले हफ्ते में 8 लाख 50 हजार शौचालय बने और बीबीसी वालों ने ये हिसाब किया।
हफ़्ते में सात दिन होते हैं ! दिन में 24 घंटे यानी सात दिन में 168 घंटे हुए !
प्रधानमंत्री के दावे पर यकीन किया जाए तो बिहार में हरेक घंटे 5059 टॉयलेट यानी हर मिनट 84 टॉयलेट का निर्माण हुआ !
बहुत बढ़िया हिसाब है। लेकिन अब जरा इनके समझ और भाषा पर भी गौर करना चाहिए।
पहले भाषा की बात:
मोदी जी ने कहा कि निर्माण कार्य पूर्ण कर दिया। ये तो नहीं कहा कि पिछले हफ्ते में ही सारे शौचालय बनाये गए। निर्माण कार्य कब शुरू किया गया इसका कोई जिक्र तो नहीं था। फिर यह फैसला बीबीसी वालों ने कैसे लिया कि एक हफ्ते में ही पूरा हो गया। चलो भाई जाने दो। वरिष्ठ लोग हैं। शायद मैं ही भाषा समझने में गलती कर बैठा। अब क्या करें। हिंदी तो बस ग्रेजुएशन तक पढ़ी है। बाकी गणित और कंप्यूटर का विद्यार्थी रहा हूँ तो वही बात करूँगा अब।
बात से पहले ये बताइये कि अगर एक धोती को धूप में सूखने में एक घंटा लगता है तो एक सौ धोती को सूखने में कितना वक़्त लगेगा?
सही पकडे हो बीबीसी वालों, पूरे 100 घंटे लगेंगे तुम्हारे हिसाब से।
बिलकुल वैसे ही जैसे एक के बाद एक शौचालय बनने जरुरी हो। ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि एक साथ सारे शौचालय बनने शुरू हो गए हों।
अगर एक ही हफ्ते को मान लें तो ऐसा क्यों नहीं हो सकता है कि हफ्ते भर में एक शौचालय बन जाये। और अगर एक बन सकता है तो 8 लाख 50 हजार क्यों नहीं बन सकते हैं। किसी मशीन में बन रहा है क्या जो एक के बाद एक बनेगा।
एक अनुरोध है बीबीसी वालों। पत्रकारिता बहुत ही सम्माननीय पेशा है। ऐसी गणित और हिंदी मत सिखाओ कि अगली वाली पीढ़ी हिसाब करना भी भूल जाये। खबर दिखाओ, भांडगिरी न करो।
अगर हिंदी और गणित पर बात नहीं आती तो मुझे बोलना नहीं पड़ता। हिंदी हम जैसे लोगों की माँ है और गणित प्रेमिका। दोनों का ही अपमान असहनीय है।

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